आज आप इस पैगाम के जरिए जानेंगे कि Ishraq Ki Namaz Ka Tarika क्या होता है, हम सभी मोमिनो के लिए सबसे अफजल और आला तोहफा जो खुदा ने दिया वो नमाज़ है, इस तोहफ़ा को कुबूल करने यानी नमाज़ अदा करने से हमारा रब राज़ी होता है।
हम सभी को हर वक्त अपने रब का शुक्रिया अदा करते रहना चाहिए, और हमेशा अपने रब के बताए हुए रास्ते पर चलना चाहिए, हम सभी के लिए हर रोज तो पांच वक्त की नमाज़ अदा करने का हुक्म है लेकिन कुछ ऐसे आमाल भी है जिसे पढ़कर हम ज्यादा सवाब हासिल कर सकते हैं।
Ishraq Ki Namaz Ka Tarika
इशराक की नमाज़ दो दो रकअत करके मुकम्मल किया जाता है, इस नमाज़ को मुकम्मल अदा करने का तरीका बताया गया है:-
Ishraq Ki Namaz Ka Tarika – पहली रकअत
- सबसे पहले नियत करें, अगर आपको नियत नहीं मालूम है तो मैने इशराक की नियत नीचे बताया है।
- जब नियत में अल्लाहु अकबर कहने लगे तो अपने दोनों हाथों को कानों कि लौ तक उठाएं और नीचे हाथ करके नियत बांध लें।
- इसके बाद सना पढ़ें यानी ‘सुब्हान कल्ला हुम्मा व बिहम्दिका व तबारा कस्मुका व तआला जद्दुक वला इलाहा गैरुक’ पढ़ें।
- फिर अउजुबिल्लाहि मिनशशैतानिर्रजीम इसके बाद बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम पढ़ें।
- अब आप अल्हम्दु शरीफ यानी सुरह फातिहा पढ़ें फिर पूरा पढ़ने के बाद आहिस्ते से ‘आमीन’ कहें।
- इसके बाद कुरान शरीफ की कोई भी छोटी बड़ी सूरह को पढ़ सकते हैं।
- इसके बाद अल्लाहु अकबर कहते हुए रूकुअ में जाएं और तीन पांच या सात बार सुब्हान रब्बियल अजिम पढ़ें।
- फिर उठते वक्त समिअल्लाहु लिमन हमिदह कहें और उठने के बाद रब्बना लकल हम्द कहें।
- इसके बाद अल्लाहु अकबर कहकर सज्दा में जाएं और यहां पर तीन, पांच या सात बार सुब्हान रब्बियल अअला पढ़ें।
- फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए थोड़े समय के लिए बैठे फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए पिछली बार की तरह सज्दा करें।
- फिर लंबे सांस में अल्लाहु अकबर कहते हुए सीधे खड़े हो जाएं यहां तक इशराक की दो रकअत में से पहली रकअत मुकम्मल हो गई,
- अब दुसरी रकअत के लिए अल्लाहु अकबर कहते हुए खड़े हो जाएं।
Ishraq Ki Namaz Ka Tarika – दूसरी रकअत
- अब सिर्फ बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम पढ़ कर सुरह फातिहा पढ़े।
- फिर सुरह फातिहा पढ़ने के बाद आहिस्ते से आमीन कहे, फिर कुरान शरीफ की कोई भी छोटी सुरह या बड़ी सूरह को पढ़ें।
- इसके बाद अल्लाहु अकबर कहते हुए रूकुअ में जाएं और कम से कम तीन मर्तबा सुब्हान रब्बियल अजिम पढ़ें।
- फिर उठते वक्त समिअल्लाहु लिमन हमिदह पढ़ें और उठने के बाद रब्बना लकल हम्द कहें।
- अब अल्लाहु अकबर कहते हुए सज्दा करें और यहां पर कम से कम तीन बार सुब्हान रब्बियल अअला पढ़ें।
- फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए थोड़े समय के लिए बैठे फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए पिछली बार की तरह सज्दा करें।
- इसके बाद अल्लाहु अकबर कहते हुए तशह्हुद के लिए बैठ जाए और अतहियात पढ़ें।
- जब कलिमे ‘ला’ यानी अशहदु अल्ला पर पहुंचे तो अपने दाहिने हाथ की शहादत उंगली उठाएं और इल्ला पर गिरा दे।
- अब दुरुद शरीफ पढ़े आपको यह मालूम होगा कि यहां पर दुरूद ए इब्राहिम पढ़ा जाता है।
- अब आखरी में सिर्फ दुआ ए मासुरह को पढ़ें और सलाम फेर लें।
- सबसे पहले अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह कहते हुए दाहिने कन्धे कि ओर गर्दन को घुमाएं।
- फिर बाएं कंधे की ओर अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह कहते हुए गर्दन को घुमाएं।
- यहां पर आपकी इशराक की नमाज़ की दोनों रकअत भी मुक्कमल हो गई।
इसी तरह दो- दो रकअत करके आप चाहें तो चार रकअत, आठ रकअत या बारह रकअत जितनी चाहें अदा करें।
इशराक की नमाज़ की नियत
इशराक की दो रकअत नमाज़ की नियत:- नियत कि मैंने दो रकअत नमाज इशराक की नफ्ल वास्ते अल्लाह तआला के रूख मेरा काअबा शरीफ की तरफ अल्लाहु अकबर।
अरबी नियत हिन्दी में:- नवैतुवन उसल्लीय लिल्लाही तआला रकाति सलावतिल नफ्ली मुतवाजि़हन इल्लाजिहातिल काअबतिश सरीफत्ही अल्लाहू अकबर।
इशराक की नमाज़ की रकात
इशराक की नमाज़ आप दो 2 रकअत से लेकर बारह 12 रकअत या फिर जितनी चाहें अदा कर सकते हैं अगर आप चाहें तो 2 दो रकअत, 4 चार रकअत, 6 छः रकअत, या 8 आठ रकअत जितनी चाहे पढ़ सकते हैं।
ये इशराक की नमाज़ एक बा बरकत और काफ़ी फजीलत वाली नमाज़ है, आपको चाहिए कि अगर आपके पास वक्त हो तो ज्यादा मात्रा में इस नमाज की दो दो रकअत करके बड़ी नमाज अदा करें क्यूंकि कहीं भी तोहफ़ा को ज्यादा पेश करना चाहिए।
आप इस नमाज़ को नहीं अदा कर पाते हैं तो कोई हर्ज नहीं है आप गुनाहगार नहीं होंगे लेकीन जितना आप इस नमाज़ की रकात की ज्यादा तादाद में अदा करेंगे उतना ही आप सवाबदार होंगे इसीलिए इशराक की नमाज़ जब भी अदा करें ज्यादा से ज्यादा मात्रा में नमाज़ अदा करें।
इशराक की नमाज़ का टाइम
इशराक की नमाज़ को अदा करने का वक्त फजर की नमाज़ के कुछ देर बाद यानि अफताब बुलन्द होने मतलब सूरज चमकने के बीस मिनट बाद अदा करने का दुरूस्त वक्त है।
अगर किसी दिन आसमान में बादल के कारण या किसी कारण आपको आफताब बुलन्द होने की उम्मीद न दिखाई दे तो ऐसे में आप इसे वक्त के लिहाज से अदा कर सकते हैं जैसे इस तरह वक्त का लिहाज़ करें कि कहीं भी सूर्योदय यानी अफताब बुलन्द होने की जानकारी मालुम करें और उसी के ठीक बीस मिनट बाद नमाज़ अदा करें।
ऐसे दिनों में ज्यादा ताखीर यानी देर से इशराक की नमाज़ को मुकम्मल करने की कोशिश करें, इसका अंदाजा आप जन्त्री या मस्जिद से भी लगा सकते हैं क्यूंकि मस्जिदों में अवकाते नमाज़ के साथ अफताब बुलन्द होने का समय लिखा रहता है।
इशराक की नमाज़ की फज़ीलत
हुजूरे अक्दस सल्लल्लाहो तआला अलैही वसल्लम ने फ़रमाया कि जो शख्स फज्र की नमाज़ जमाअत से पढ़ कर जिक्र ए इलाही करता रहे यहां तक कि सूरज बुलंद हो जाए फिर 2 दो रकअत नमाज ए इशराक पढ़े तो उसे पूरे एक हज़ और उमरे का सवाब मिलेगा।
हज़रत अबू ज़र रजिअल्लाहो अन्ह रसुलुल्लाह सल अल्लाहु अलैह वस्सलाम से रिवायत करते हैं कि आप सल्लल्लाहो अलैही वसल्लम ने फ़रमाया कि अल्लाह तआला फरमाता है कि ऐ आदम कि औलाद दिन के शुरूआत में चार 4 रकअत पढ़ लिया कर मैं दिन के आखिरी तक तेरा ज़िम्मेदार हुं।
आखिरी बात
हमने इस पैगाम के जरिए आप तक इशराक की नमाज़ अदा करने का मुकम्मल और दुरुस्त तरीका बताया है, इसके माध्यम से आपने इशराक की नमाज़ से जुड़ी सभी इल्मेंं हासिल किया, इसे पढ़ने के बाद आप आसानी से इशराक की नमाज़ दुरूस्त तरीके से अदा पाएंगे।
हमने इस पैगाम में आपको बेहतरीन तरीके से सभी बातों को आसानी से समझने के लिए हर एक लफ्ज़ को सरल भाषा में लिखा है, इसे पढ़ने के बाद आप सभी जानकारी को आसानी से समझ गए होंगे।
Thank you so much sir ❤️❤️
Masaallah
Thank you ♥️
ZazakAllahu khair
Kya baat he Masha Allah 💪💪🤷♂️🤷♂️😘😘
Bhut bhut shukriya aapka hm such me bhut confuse the dadi ammi ko padhte dekha tha lekin unko guzre zamana ho gya lekin aapki post de saare doubts clear ho gye Alhamdulillah 😍😍😍😍
Masha Allah❤️❤️❤️❤️
It’s really knowledgeable 😍
Mashaallah
Bahut hii khubsurat hai
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